धर्मांतरण रैकेट: जेल से निकला तो ताराचंद बन गया ताहिर, बीवी की कर दी हत्या
उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक जेल में धर्मांतरण का एक मामला सामने आया है। हत्या के एक मामले में जेल की सजा काट रहा 46 साल का ताराचंद जब जेल से बाहर निकला तो वह ताहिर बन चुका था और उसकी दाढ़ी चुकी थी। धर्मांतरण करने के सवाल पर उसने कहा कि वह सिर्फ नमाज पढ़ता है, धर्म नहीं बदला है। वह मंदिर और मस्जिद दोनों जगह जाता है। ईश्वर हर जगह एक ही है। इबादत के लिए कोई भी तरीका अपनाने में क्या बुराई है।
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| ताराचंद उर्फ ताहिर (फोटो साभार: टीवी9) |
दरअसल, ताराचंद पिछले 43 महीने से जेल में सजा काट रहा था, लेकिन उसका कहना है कि उसका परिवार जेल से निकलने में उसकी मदद नहीं की। इस दौरान जेल में उसका साथी बना उस्मान ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर ताराचंद की मदद की और परोल पर उसे जेल से बाहर निकलवाया। ताराचंद के लिए उस्मान ने फंड जुटाया, जिससे वह केस लड़ सका।
ताराचंद का कहना है कि उसने उस्मान के साथ जेल में काफी समय बिताया, इसी दौरान उस्मान से उसकी अच्छी दोस्ती हो गई। उसने साथ में नमाज पढ़ी और अपनी दाढ़ी भी बढ़ा ली, लेकिन कभी धर्म नहीं बदलवाया। वहीं, गांव के श्याम का आरोप है कि ताराचंद ने जेल में धर्मांतरण कर लिया। अब वह गांव के दूसरे लोगों को भी धर्मांतरण के लिए बरगला रहा है।
वहीं, जेल प्रशासन ने अपनी इज्जत को बचाने के लिए जेल में धर्मांतरण की बात से इनकार कर दिया है। मुंडाली थाना प्रभारी रवि चंद्रवाल ने बताया कि ताराचंद के धर्मांतरण के कोई सुबूत नहीं मिले हैं। श्याम की शिकायत के आधार पर इस मामले में धर्मांतरण के नए कानून के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
आरोप यह भी है कि उसका जेल में ब्रेनवॉश किया गया है और उसने दो लाख रुपए लेकर धर्मांतरण किया है। हिंदू से मुस्लिम बना ताराचंद उर्फ ताहिर का कहना है कि उसे किसी दबाव में धर्मांतरण नहीं किया है और ना ही इसके लिए उसे कोई फंडिंग नहीं हुई है। हालांकि इस पूरे मामले पर इंटेलीजेंस सहित अन्य विभाग अपनी नजर रखे हुए है।
धर्मांतरण करने वाला ताराचंद उर्फ ताहिर मुंडाली थाना क्षेत्र के मऊखास गांव में रहता है और पेशे से ड्राइवर है। इसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो कुछ साल पहले इसे छोड़कर चले गए। मिली जानकारी के मुताबिक ताराचंद अक्सर ड्राइवरी करने के चलते लंबे समय तक परिवार से दूर रहता था। ताराचंद का आरोप है कि इस बीच उसकी बीवी की नजदीकियां किसी अन्य के साथ बढ़ गई।
एक दिन अपनी पत्नी को आपत्तिजनक स्थिति में प्रेमी के साथ देख लिया और उसकी हत्या कर दी। इस मामले में वह 2017 से जेल में सजा काट रहा था। अब पेरोल पर बाहर है, घर पर वह नमाज और मुस्लिम तौर–तरीकों का पालन कर रहा है, जिसका विरोध ग्रामीणों ने किया, पुलिस ने ताराचंद से पूछताछ भी की है। गुप्तचर विभाग भी अपनी जांच कर रहा है।
ताराचंद का कहना है कि 2015 में वह बंगाल के रहने वाले मोहम्मद के संपर्क में आया था, लगभग दो साल उसके साथ काम किया। दिल्ली के अप्सरा बार्डर से वह बिहार होते हुए गोवाहाटी (असम) गया था, वहां सबसे पहले उसने नमाज पढ़ी थी, कुछ समय बाद वह हत्या के मामले में जेल चला गया, वहां घोसीपुर के रहने वाले उस्मान ने मदद की।