नई दिल्ली, केंद्र सरकार द्वारा पिछडे सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा का कई राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने आरक्षण के प्रस्ताव का समर्थन किया है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के अध्यक्ष और केंद्र में मंत्री रामदास अठावले ने सवर्ण आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर कर 25 प्रतिशत करने की मांग की है।

 केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सवर्ण आरक्षण की वकालत करते रहे हैं। पासवान ने पटना में गरीब सवर्णों के पक्ष में 15 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते मायावती ने उन्होंने केंद्र सरकार को इस संबंध में पत्र भी लिखा था। 

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। केजरीवाल ने ट्विटर पर कहा, “चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे, हम सरकार का साथ देंगे।” उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो स्पष्ट हो जाएगा कि यह चुनाव से पहले भाजपा का मात्र जुमला है। ‘आप’ के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी ट्वीट कर कहा- ‘आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्ण जातियों के लिए मोदी सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण का स्वागतयोग्य है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “बहुत देर कर दी मेहमान आते-आते। यह ऐलान ऐसे वक्त हुआ है जब चुनाव नजदीक है। वे कुछ भी कर लें, उनका कुछ नहीं होने वाला। कोई भी जुमला उछाल दें, उनकी सरकार नहीं बचने वाली।”

आठवले ने कहा था कि सवर्णों में सभी आर्थिंक रूप से सम्पन्न नहीं होते, इसलिए सवर्ण जातियों को 8 लाख रुपये की क्रीमीलेयर लगाकर 25 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।