वास्तु का वास्तविक अर्थ होता है निवास करना अर्थात जिस भूमि पर मनुष्य निवास करता है उस ‘वास्तु’ कहा जाता है। यहां हम आपको वास्तु-शास्त्र के एक ऐसे रहस्य के बार में बताएँगे जिसको जानने के बाद आप, अपने नाम के अनुसार, किसी भी एक विशेष शहर में जहाँ पर आप रहते हों या रहने की सोच रहे हों लाभ प्राप्त करेंगे या हानि होगी या हानि-लाभ बराबर की स्थिति होगी ये जान सकेंगे।

ये बात एक विशेष प्रकार के वर्ग से जानी जा सकती है जिसका चित्र इस पृष्ठ पर बना हुआ है। इस पद्धति का वर्णन नारद-पुराण में आया है। इस पृष्ठ पर दिए गए चित्र में एक बड़ वर्ग (Square) में नौ छोटे वर्ग (Square) बने हुए हैं। इनमें से आठ छोटे वर्गों में, हिंदी वर्णमाला के अनसुार एक-एक वर्ग है। जैसे ‘त’ वर्ग में हिंदी वर्णमाला के त, थ, द, ध, और न अक्षर आयेंगे। इसी प्रकार से ‘प’ वर्ग में प, फ, ब, भ, और म अक्षर आयेंगे। हर वर्ग के लिए एक दिशा निर्धारित की गयी है जो उस वर्ग के आगे लिखी गयी है।

उदहारण के लिए मान लीजिये – ‘नीरज’ नाम का व्यक्ति ‘गुरुग्राम’ में रहना चाहता है तो सबसे पहले उसे अपने नाम का वर्ग देखना होगा। यहाँ पर नीरज शब्द ‘न’ अक्षर से शुरु होता है और न अक्षर ‘त’ वर्ग के अंतर्गत आएगा। इस प्रकार निरज का वर्ग ‘त’ वर्ग हुआ और दिशा पश्चिम हुई। अब इसी प्रकार स गुरुग्राम का वर्ग ‘क’ वर्ग हुआ और दिशा आग्नेय हुई। इस वर्ग का एक सामान्य नियम है कि अपने से सम्मुख दिशा में यानि अपने वर्ग से पांचवें वर्ग में निवास नहीं करना चाहिए। अब देखना है कि नीरज के लिए गुरुग्राम कैसा रहेगा। नीरज के वर्ग स गुरुग्राम का वर्ग छठा वर्ग पड़ेगा इसलिए नीरज के लिए गुरुग्राम योग्य स्थान हुआ रहने के लिए।

अब देखना है कि नीरज नाम के व्यक्ति को गुरुग्राम में रहने तथा व्यापार (Business) करने से फ़ायदा होगा या नुकसान। यहाँ पर नीरज की वर्ग-संख्या 5 है और गुरुग्राम की वर्ग-संख्या 2 है अब हम जिस सूत्र (Formula) का प्रयोग करेंगे वो इस प्रकार है –

व्यक्ति की वर्ग-संख्या व स्थान की वर्ग-संख्या ÷ 8 = धन (लाभ)

स्थान की वर्ग-संख्या व्यक्ति की वर्ग-संख्या ÷ 8 = ऋण (खर्च)

यहाँ पर सूत्र (Formula) में व्यक्ति और स्थान की वर्ग संख्या को एक साथ रखना है ना कि उनका गुणा करना है।

इस प्रकार से इस उदहारण में व्यक्ति और स्थान की वर्ग-संख्या एक साथ रखने पर हमें शेष संख्या 52÷8 = 4 (चार) मिली। यह व्यक्ति का धन हुआ और इसके विपरीत, स्थान की वर्ग-संख्या, व्यक्ति की वर्ग संख्या के साथ रखने पर हमें शेष संख्या 25÷8 = 1 मिली, यह व्यक्ति का ऋण यानि खर्च हुआ।

इस तरह स हमें पता चला कि नीरज नाम का व्यक्ति यदि गुरुग्राम में रहकर व्यापार करता है या आजीविका कमाता है तो उसके लाभ और खर्च का अनुपात (Ratio) चार और एक का होगा यानि वो चार रुपये कमायेगा तो एक रुपये उसका खर्च होगा और अंततः वो तीन रुपये फ़ायदे में होगा।

कुछ विद्वानों की मान्यता है कि यहाँ 8 से भाग देने पर यदि शेष 0 (शून्य) बचता है तो उसे 8 ही मानना चाहिए।