कलियुग के अंत में सूख जाएगी गंगा, भीषण गर्मी व अपराध से मचेगा हाहाकार
कलियुग को शास्त्रों में बहुत ही कठोर व दुखों वाला युग माना जाता है। इसे एक कारागार कहा गया है जहां मनुष्य अपने बुरे कर्मों के कारण जन्म लेता है। इस युग में जन्म लेने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पूर्णतया चिंतारहित जीवन व्यतीत करता है। हालांकि, कलियुग के अंतिम चरण की तुलना में अभी बहुत बेहतर है। इस युग के विषय में भगवत पुराण में सुखदेव जी ने विस्तार पूर्वक वर्णन किया है,
जब घोर कलियुग होगा तब क्रोध, वासना, अहंकार, इच्छाएं तथा वस्तुओं से लगाव चरण सीमा पर होगा। लोग केवल स्वयं को ही महत्वपूर्ण देंगे। माता-पिता, भाई-बहन जैसे रिश्तो में कोई स्नेह, प्रेम और सेवा की भावना नहीं बचेगी। शास्त्रों में के अनुसार, जब कलियुग अपनी चरम सीमा पर होगा, तब शोषण, जुआ, शराब, व्यभिचार आदि यह एक साधारण सी बात ही होगी।
कलियुग के अंत में प्रत्येक व्यक्ति इन कुकर्मों का हिस्सेदार होगा। ऐसी गतिविधियां साधारण जीवन-यापन का एक हिस्सा हो गई हैं। कलियुग के अंत में लगभग सभी लोग रोगग्रस्त और अस्वस्थ होंगे। भोजन, पानी तथा अन्य प्राकृतिक सुविधाओं की पूरी धरती पर कमी हो जाएगी। नदियां सूख जाएंगी, आकाश प्रदूषण से काला दिखने लगेगा, दरिद्रता, भूख, प्यास पूरी तरह फैल जाएगी। घोर कलियुग के दौरान कोई धार्मिक कार्य न होने के कारण चारों तरफ सिर्फ नकारात्मक होगा और प्रत्येक व्यक्ति बुराई की ओर अग्रसरित होगा।
कलियुग के अंतिम चरण में सबको केवल धन की अभिलाषा होगी, स्त्रियां 15 वर्ष की आयु से पहले मां बन जाएंगी। कलियुग के 5000 वर्ष पश्चात गंगा नदी पूरी तरह सूख जाएगी, सभी देव अपने अपने लोक लौट जाएंगे और धरती से अन्न उपज खत्म हो जाएगा। पेड़ों पर फल नहीं होंगे और गाय भी दूध देना बंद कर देगी। नैतिकता लोगों के जीवन से नष्ट हो जाएगी। भाई अपने सगे भाई की भी हत्या करने में कोई संकोच नहीं करेगा। धरती पर चारों ओर हाहाकार मच जाएगा। अपराधियों की संख्या इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि जो लोग अच्छे होंगे उनके लिए जीवन व्यतीत करना कठिन हो जाएगा।
मनुष्य पाप की सीमाओं को लांघ कर पशुओं से भी नीचे गिर जाएगा। पशुओं और इंसानों में कोई अंतर नहीं रहेगा। इंसान, इंसान को ही खाना शुरु कर देगा। भयंकर गर्मी का मौसम होगा, जिसके कारण एक के बाद एक लोग तड़प-तड़प कर मरते रहेंगे। जब बुराइयां चरम सीमा पर होंगी और धरती पाप के बोझ तले दब जाएगा, तब भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होगा। श्रीमद्भागवत के अनुसार, भगवान कल्कि संभल गांव के विष्णु यसा नामक ब्राह्मण तथा उनके पत्नी के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे।
भगवान कल्कि एकविशाल घोड़े पर सवार होकर सब अधर्मियों का नाश करेंगे। कलियुग के अंतिम समय में लगातार वर्षा होगी, जिससे केवल पूरी पृथ्वी पर पानी ही पानी होगा। समस्त धरती पर जल ही जल होने के कारण सभी प्राणियों का अंत हो जाएगा।
कलियुग के अंतिम चरण पर केवल गिने-चुने लोग ही बचेंगे जो भगवान के भक्त होंगे। यह लोग सभी बुराइयों से दूर धर्मपालक तथा भगवान की भक्ति में मग्न होंगे। केवल ऐसे ही लोग प्रलय के प्रकोप से बचे रहेंगे और सतयुग में प्रवेश करेंगे और भगवान की लीलाओं का आनंद लेंगे।