चीन के वुआन से फैले कोरोना वायरस से जुझ रही दुनिया के लिए अभी तक राहत की कोई खबर नहीं आई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार दावा किया है कि कोरोना वायरस का वैक्सीन साल के अंत तक उपलब्ध हो जाएगा। दरअसल, इस महामारी से सबसे अधिक मौतें अमेरिका में हुई हैं।

 

कोरोना वायरस के इलाज के लिए वैक्सीन की खोज पहले से ही दुनिया भर में तेज हो गई है। यूरोपीय संघ ने एक अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा कार्यक्रम ( International Medical Program) स्थापित करने का वादा किया है, जिससे कोरोना वायरस से लड़ने की वैश्विक प्रक्रिया का नेतृत्व किया जा सके और वैक्सीन बनाने के लिए 8 बिलियन अमरीकी डॉलर का फंड इकट्ठा किया जा सके।

ब्रिटेन में, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कोविड-19 के संभावित वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो गए हैं। इस बीच, यूरोप के अन्य डेवलपर्स ने भी कोरोना वायरस के कारण होने वाली बीमारी के खिलाफ अपने काम को आगे बढ़ा दिया है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका की कंपनियों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं में कम-से-कम 115 वैक्सीन परियोजनाएं चल रही हैं। स्पुतनिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जोर देकर कहा था कि कोरोना वायरस का टीका विकसित होने पर दुनिया भर में प्रत्येक व्यक्ति के लिए सार्वभौमिक तौर पर उपलब्ध होना चाहिए।

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार, अमेरिका में कोरोना वायरस की महामारी से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 11 लाख 57 हजार 687 हो गया है, जबकि वायरस से जान गंवाने वालों की कुल संख्या 67,674 हो गई है। कोरोना महामारी की वजह से वैश्विक स्तर पर अबतक 2 लाख 47 हजार 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 35 लाख को पार कर गई है।