18 वर्षीय युवा के स्टार्टअप में टाटा ने खरीदा 50 फीसदी हिस्सेदारी, दो साल पहले शुरू हुई थी कंपनी
मुंबई, मुंबई के एक स्टार्टअप में टाटा समूह के रतन टाटा (ratan tata deal) ने निवेश किया है। इस कंपनी को अर्जुन देशपांडे ने 16 साल की उम्र में दो साल पहले शुरू की थी। इस स्टार्टअप का नाम ‘जेनरिक आधार’ (generic aadhaar) है। बताया जा रहा है कि टाटा ने इसमें करीब 50 फीसदी हिस्सा खरीदा है। जेनरिक कंपनी के जरिए अर्जुन चाहते हैं कि बुजुर्गों और पेंशनभोगियों को जरूरत की दवाई कम से कम कीमत में मिले। वह कहते हैं कि करीब 60 फीसदी आबादी महंगी होने की वजह से दवा नहीं खरीद पाती है, इसलिए वह कीमत को घटाना चाहते हैं।
दरअसल, यह कंपनी सीधे मैन्युफैक्चरर्स से सामान लेकर रिटेलर्स को बेचती है। इस वजह से रिटेलर्स की कमाई करीब 20 फीसदी बढ़ गई है। वर्तमान में इस कंपनी का रेवेन्यू करीब 6 करोड़ रुपये हैं और अगले तीन सालों में इसे 150-200 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अर्जुन का आइडिया बिल्कुल यूनीक है। उनका मॉडल फार्मेसी-एग्रीगेटर बिजनस मॉडल है। ये यूनीक आइडिया ही है, जिसमें रतन टाटा जैसे बड़े कारोबारी को भी लुभा लिया, जिसके चलते उन्होंने जेनरिक आधार कंपनी में निवेश किया है।
18 वर्षीय अर्जुन को अपनी मां से प्रेरणा मिली है, जो इंटरनेशनल फार्मा बिजनेस से जुड़ी हुई हैं। वह अपने स्कूल की छुट्टियों में अमेरिका, वियतनाम, चीन और दुबई जैसे देशों में जाया करते थे, जिस दौरान उन्हें ये कंपनी खोलना का आइडिया सूझा। वह बहुत से आयातकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी मिलते थे, जिससे पता चला कि अन्य देशों में सस्ती दवाएं मिलती हैं। उन्होंने जब मां से पूछा कि भारत में दवाइयां महंगी क्यों हैं तो पता चला कि भारत में अधिकतर जेनरिक दवाएं ब्राड के जरिए प्रमोट की जाती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं।