प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर प्रदेश के मोहनलालगंज से भाजपा सांसद 61 वर्षीय किशोर को आवासीय एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री का प्रभार मिला है। मंत्रिमंडल में शामिल होने के अगले दिन गुरुवार (8 जुलाई 2021) को उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी.एल. संतोष से शिष्टाचार वश मुलाकात की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचरा वश मुलाकात करते राज्य मंत्री कौशल किशोर


रक्षा मंत्री से भेंट करने के बाद किशोर भाजपा के केंद्रीय कार्यालय पहुंचकर डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया। गौरतलब है कि किशोर का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है, लेकिन इसी जीवन उन्हें कार्यकर्ताओं का साथ और विश्वास भी दिया है। 

मंत्री बनने पर उनके लोकसभा क्षेत्र में जश्न का माहौल रहा है। मोहनलालगंज से सैकड़ों कार्यकर्ता किशोर को बधाई देने के लिए विसंभरदास मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुँचे। बधाई देने वालों में कैलाश सांखला, दिल्ली विकास प्रधिकरण के सदस्य एवं निगम पार्षद पंजाबी बाग, बक्शी का तालाब क्षेत्र के चेयरमैन अरुण सिंह गप्पू, सांसद प्रतिनिधि प्रवीण अवस्थी, कौशल किशोर यूथ ब्रिगेड के संगठन मंत्री सुबोध रावत आदि सैकड़ों समर्थक उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार के तहत पद और गोपनीयता की शपथ लेने वाले 43 नेताओं में कौशल किशोर भी थे। कौशल किशोर अपने 30 सालों के राजनीतिक करियर में दो बार लोकसभा सांसद रहे हैं। वह वह साल 2002 से 2007 तक उत्तर प्रदेश में विधायक भी रह चुके हैं और साल 2003-04 में मुलायम सिंह की सरकार में राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।

कौशल किशोर का जन्म 1960 में उत्तर प्रदेश के बेगरिया गांव में हुआ था। पासी समुदाय से आने वाले किशोर को हाल ही में बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा का राज्य प्रमुख बनाया गया था। उन्हें अनुसूचित जातियों में गहरी पैठ वाला नेता माना जाता है। 

कौशल किशोर का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। बचपन में ज्यादा पैसे न होने के उनके पास बहुत सीमित साधन थे। पढ़ाई के वह 20 किलोमीटर पैदल जाया करते थे। साल 1977 में 12वीं क्लास में उन्हें छात्रवृत्ति मिली, तब जाकर उन्होंने साइकिल खरीदी थी।

पढ़ाई-लिखाई में औसत थे, लेकिन ईमानदारी के लिए लोगों के बीच लोकप्रिय थे। गांव वाले उनकी बहादुरी की मिसाल दिया करते है। कहा जाता है कि सच की लड़ाई के लिए वह किसी से भिड़ जाया करते थे।