रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जो दावा किया है वह भारत के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने वाला है। पुतिन ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन में महारत हासिल किए इराक और सीरिया के आतंकी अफगानिस्तान में तेजी से दाखिल हो रहे। पूर्व-सोवियत स्टेट के सिक्योरिटी सर्विस प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पुतिन ने कहा कि अफगानिस्तान में हालात सामान्य कतई नहीं हैं। 

 

पुतिन ने कहा कि ये आतंकी सीधे तौर पर सीमा विस्तार की कोशिश में पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैला सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकी समूह अफगानिस्तान संकट का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य अफगानिस्तान में रिफ्यूजी बनकर पूर्व सोवियत देशों में दाखिल होना है।

 

रुस की इस चेतावनी में भारत के लिए भी गंभीर संकेत दिए गए हैं। अफगानिस्तान भारत का पड़ोसी देश है। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के साथ ही पाकिस्तान के आतंकी समूहों में एक नया जोश आ गया है। ये आतंकी समूह छद्म नामों से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं और या फिर उन्हें समर्थन देते हैं। साथ ही इस्लामिक स्टेट और अल कायदा जैसे इस्लामिक संगठन भारत को समय-समय पर गीदड़ भभकी देते रहते हैं। ऐसे में अगर सैन्य ऑपरेशन में एक्सपर्ट इन आतंकियों का साथ मिल जाता है तो भारत के लिए वाकई समस्या पैदा हो जाएगी, पाकिस्तान एवं चीन जैसे भारत के घोर विरोधी इसी ताक में बैठे हैं।

वहीं, एशियाई देशों को आगाह करने वाला रुस अफगानिस्तान में तालिबान की नई सरकार को लेकर सकारात्मक रहा है, फिर भी अफगानिस्तान की अस्थिरता को लेकर चिंतित है। रुस को डर है कि अगर ये अस्थिरता मध्य एशिया में भी फैलती है तो रुस के मिलिट्री बेस के लिए खतरे उत्पन्न हो जाएँगे। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद रूस ने सोवियत संघ का हिस्सा रहे ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में मिलिट्री ड्रिल आयोजित कीं। इन दोनों देश की सीमाएँ अफगानिस्तान के साथ लगती हैं।

वहीं, ताजिकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सैमुमिन यतिमोव ने कहा कि उन्होंने नोटिस किया है कि अफगानिस्तान से उनके देश में ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी करने की कोशिशों में बढ़ोत्तरी हुई है। अफगानिस्तान लंबे समय से दुनिया में अफीम और हेरोइन का सबसे उत्पादक बना हुआ है और यही तालिबान की कमाई का आज प्रमुख जरिया भी है।

इससे पहले बुधवार को फ्रांसिसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ताजिकिस्तानी नेता इमोमाली रखमोन से पेरिस में मुलाकात की थी। मुलाकात में दोनों नेताओं ने मध्य एशिया में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई थी।