साल 2500 तक भारत हो जाएगा बेहद गर्म, रहना हो जाएगा मुश्किल, ग्लोबल वार्मिंग पर वैज्ञानिकों ने चेताया
| ग्लोबल वार्मिंग (सौजन्य: पत्रिका) |
मैकगिल विश्र्वविद्यालय में प्रोफेसर एलेना बेनेट की देखरेख में पोस्टडाक्टरल शोधकर्ता क्रिस्टोफर लियोन ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के रहने योग्य पृथ्वी बना रखने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। एलेना ने कहा कि वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोतरी होती है तो हमें कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसमें सब्जियों व अन्य फसलों के लिए उपयुक्त क्षेत्र ध्रुवों की ओर बढ़ सकता है और कुछ फसलों के लिए उपयुक्त क्षेत्र में कमी भी आ सकती है। अमेजन बेसिन जैसे पारिस्थितिक तंत्र से समृद्ध क्षेत्र बंजर हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि अत्यधिक आबादी वाले ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मनुष्यों के लिए हीट स्ट्रेस घातक स्तर पर पहुंच सकता है और वहाँ रहना मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही तापमान में अधिक वृद्धि होने से सागरों का जलस्तर बढ़ेगा। इससे दुनिया के कई तटीय देश समुद्र में विलीन हो जाएँगे।
लियोन के मुताबिक, पेरिस समझौते के तहत 30 वर्षों से अधिक समय का जो बेंचमार्क तय किया गया है, वह अदूरदर्शी है। शोधकर्ताओं ने सलाह दी कि जलवायु अनुमान और नीतियां वर्ष 2100 तक नहीं रुकनी चाहिए, क्योंकि इसकी पूरी आशंका है कि जलवायु परिवर्तन का असर उसके बाद के वर्षों में और अधिक देखने को मिलेगा।