बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी स्थित महमदपुर में गाँव में पिछले साल होली के दिन एक क्षत्रिय परिवार के छह लोगों की निर्मम हत्या करने वाले आरोपियों को अपने गाँव में आश्रय देकर विवादों में आए स्थानीय बिस्फी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल के बोल बिगड़ गए हैं। हिंदूवादी नेता की पहचान बनाने के चक्कर में अनर्गल बयान देने वाले ठाकुर के बयान से भाजपा अक्सर असहज हो जाती है और पार्टी की छवि कट्टरवादी की बन जाती है।

हरिभूषण ठाकुर बचौल (फोटो साभार: न्यूज18)

मधुबनी के बिस्फी से भाजपा के विधायक ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि मुसलमानों को वोट देने का अधिकार छिन लेना चाहिए, क्योंकि मुसलमानों को 1947 में एक देश मिल चुका है और उन्हें वहीं पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अगर वे भारत में रहते हैं तो उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रहना होगा।

ठाकुर यहीं नहीं रूके। उन्होंने मुसलमानों को मानवता का दुश्मन बता दिया और कहा कि वे पूरी दुनिया को नष्ट करना चाहते हैं। मुस्लिम दुनिया को इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते हैं। 

ठाकुर के बयान पर सोशल मीडिया यूजर उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं। मिथलांचल का होकर भी मर्यादा खोने का उन पर आरोप लगाया जा रहा है। दरअसल, कल से बिहार में बजट सत्र की शुरुआत हो रही है। ऐसे में इस तरह का बयान देकर ठाकुर चर्चा में बने रहना चाहते हैं। 

बता दें कि हरिभूषण ठाकुर वहीं शख्स हैं, जिन पर विपक्षी दलों ने नरसंहार करने वाले प्रवीण झा को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। बेनीपट्टी में तैनात रहे एक पूर्व अधिकारी ने कहा था कि ठाकुर अपराधियों को संरक्षण देते हैं और इसकी जानकारी सरकार को भी है। संरक्षण मिलने के कारण इन अपराधियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो पाती है।

नरसंहार के मुख्य प्रवीण झा और उसके साथियों की गिरफ्तारी भी ठाकुर के गाँव रघौली में हुई थी। हरिभूषण ठाकुर के करीबी और गोतिया धनंजय ठाकुर के घर से इन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। तब मीडिया के उनके हितैषी वर्ग ने ठाकुर को बचाने के लिए खबर चलाई थी कि आरोपियों की गिरफ्तारी नेपाल से हुई है। इन झूठी खबरों पर दरभंगा क्षेत्र के आईजी ने कहा था कि आरोपियों की गिरफ्तारी रघौली गाँव से हुई है।

जानकारी के मुताबिक धनंजय ठाकुर विधायक के संरक्षण में आर्म्स सप्लाई और शराब का धंधा करता है। इन अपराधों पर उसने बड़े पैमाने पर अवैध संपत्ति अर्जित की है और बात स्थानीय अधिकारियों को भी पता है, लेकिन संरक्षण के कारण उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

इस मामले में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने एक और स्थानीय विधायक विनोद नारायण झा की भूमिका को भी संदिग्ध बताया था। तेजस्वी ने कहा था कि झा के इशारे पर ही इस कांड को अंजाम दिया गया है।

बता दें कि पिछले साल 29 मार्च को ठीक होली के दिन ही महमदपुर गाँव में एक क्षत्रिय परिवार के छह लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। इनसे एक मंदिर का महंत और एक BSF का जवान था। मरने वालों में तीन सगे भाई और बाकी भतीजे थे। मृतकों में सुरेंद्र सिंह के तीन बेटे और भतीजा रुद्र नारायण दास सहित दो भतीजे भी शामिल थे।

बताया जाता है कि गाँव में सुरेंद्र सिंह की तालाब पर प्रवीण झा कब्जा करना चाहता था। वह रावण सेना के नाम से एक संगठन चलाकर खुद को ब्राह्मण हितैषी होने के दावा करता था। झा ने अपने 10-15 साथियों के साथ आकर पीड़ितों पर अंधाधुन गोलियाँ चला कर हत्या कर दी थी।