झारखंड के हजारीबाग (Hazaribagh, Jharkhand) के बड़कागाँव प्रखंड के सिरमा गाँव में रहने वाले अकेले हिंदू परिवार को मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। परिवार की लड़कियों को मुस्लिमों ने कान पकड़वाकर भरी सभा में जबरन उठक-बैठक कराया और उनक साथ अश्लीलता की। इतना ही नहीं, उन्हें धमकी दी कि अगर वे इस्लाम नहीं अपनाने (Religious Conversion in Islam) उन्हें गायब कर दिया जाएगा है।

हजारीबाग में हिंदू लड़कियों को पंचायत में किया जा रहा जलील

 

पीड़ित परिवार की मुखिया और विधवा महिला किरण देवी ने आरोप लगाया कि 10 अगस्त की रात को मुखिया इशरत जहां के बेटा वसीम दर्जनों लोगों के साथ रात में उनके घर घुस गया। उसने बेटियों के साथ मारपीट और अश्लीलता की और फिर उन्हें खींचकर बाहर ले गया।
बाहर ले जाकर भरी पंचायत में उनकी दोनों नाबालिग बेटियों के साथ गाली-गलौच और अश्लीलता की गई। उन्हें थप्पड़ मारे गए और कान पकड़वाकर सबके उठक-बैठक कराई गई। इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया गया। आरोपितों ने धमकी दी कि पूजा-पाठ बंद कर दो और इस्लाम अपना लो, नहीं तो गायब करवा दिए जाओगे, पता भी नहीं चलेगा।
किरण देवी का कहना है कि अगले दिन जब इस घटना की शिकायत लेकर पंचायत समिति के पास गई तो तो 15-20 लोगों ने उन्हें घेर लिया, जिसमें मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल थीं। वे सभी उन पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने लगे। उन्होंने धमकाया कि इस गाँव में रहना है तो मुस्लिम बनना होगा।
किरण देवी ने इसकी शिकायत पुलिस में की। इसके बाद मुस्लिमों ने भी उनके खिलाफ मामला दर्ज करा कराते हुए उनकी धार्मिक भावना को आहत करने का आरोप लगाया। मामला दर्ज कराने की खबर के बाद इलाके के हिंदू भड़क गए और अनशन करने लगे।
हिंदू संगठन और लोगों ने आरोपित मुस्लिमों पर तुरंत कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। हालात को देखते हुए पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपित मुखिया का बेटा फरार है।
इस मामले में मुखिया इशरत जहां के पुत्र मोहम्मद वसीम, शजीबुल्ला, मोहम्मद नाजिम, मोहम्मद तकिब, मोहम्मद आसिफ समेत 5 अज्ञात लोग आरोपित हैं। पुलिस ने मोहम्मद नदीम और मोहम्मद साकिब को गिरफ्तार किया है।
बता दे कि सिरमा गाँव है मुस्लिम बहुल और यहाँ यहीं अकेला हिंदू परिवार रहता है। दो नाबालिग लड़कियाँ, एक छोटा भाई और उनकी विधवा माँ हैं। उनके पिता तुलसी साव की पहले ही मौत हो चुकी है।
पंचायत में उसे एक वीडियो वायरल करने का दोषी बताया गया था और कहा था कि इसे वायरल करने से मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची हैं। हालाँकि, युवती ने वीडियो वायरल करने से इनकार किया था। बताया जा रहा है कि उस वीडियो में गाँव के कुछ मुस्लिम लड़के पाकिस्तान का झंडा लहरा रहे थे।