जनसंख्या नियंत्रण को ठेंगा दिखा रहा है चर्च, ईसाई आबादी बढ़ाने के लिए वित्तीय मदद का किया ऐलान
एक तरफ जनसंख्या विस्फोट से निपटने के लिए देश भर में जनसंख्या नीति लागू करने की चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ केरल के एक चर्च ने सरकार के इन प्रयासों को धत्ता बताने पर आर्थिक मदद देने की बात कही है।
जब यूपी और असम जैसे राज्यों ने जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए कदम उठाने शुरू किये हैं, इसी बीच केरल के एक चर्च ने अधिक बच्चे पैदा करने वाले ईसाई परिवारों को आर्थिक मदद देने का एलान किया है।
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| प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: Pixabay) |
चर्च ने ऐलान किया है कि जो ईसाई परिवार पांच या उससे अधिक बच्चे पैदा करेगा, उसे हर महीने 1500 रुपये आर्थिक मदद के तौर पर दिये जाएँगे। यह सुविधा वर्ष 2000 के बाद शादी करने वाले जोड़ों को दी जाएगी।
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इस योजना का मकसद देश में ईसाई समुदाय की आबादी को बढ़ाना है और इसके लिए समुदाय के लोगों को प्रेरित करना है। हालाँकि, चर्च ने वैसे इसका तात्कालिक लक्ष्य महामारी से प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचाना बताया गया है।
सिरो-मालाबार कैथोलिक गिरजाघर के पाला डायोसिस के फैमिली अपोस्टोलेट के अनुसार ‘ईयर ऑफ द फैमिली सेलिब्रेशन’ के तहत बीते सोमवार को बिशप जोसेफ कलरंगट की ऑनलाइन बैठक में यह घोषणा हुई। फैमिली अपोस्टोलेट के फादर कुट्टियानकल ने बताया कि आर्थिक मदद अगस्त से शुरू की जा सकती है।
इसके साथ ही दो और घोषणाएं महत्वपूर्ण हैं। पहली घोषणा के तहत चौथे या उससे ज्यादा बच्चों को जन्म देने वाली ईसाई समुदाय की महिलाओं को चर्च के अधीन चलने वाले अस्पतालों में प्रसूति देखभाल निशुल्क करने की घोषणा की गई है। वहीं, दूसरी घोषणा के तहत चर्च अपने इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करेगा।
दरअसल, यह योजना 2019 में चांगानाचेरी आर्चडायोसिस ने एक पत्र में कहा था कि केरल में ईसाई समुदाय की आबादी तेजी से घट रही है। उन्होंने इसे रोकने के उपायों पर विचार करने के लिए कहा था। फादर कुट्टियानकल ने बताया कि पत्र में उठाया गया मामला आज की सच्चाई है और आर्थिक मदद की घोषणा करने के पीछे यह भी एक कारण है।
साल 2019 में जोसेफ पेरूंथोत्तम द्वारा लिखे पत्र में बताया गया कि एक समय केरल में ईसाई समुदाय राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी था। अब यह तीसरे स्थान पर है और आबादी घटकर 18.38 फीसदी रह गई है।