आज अपनी खूबसूरत प्राकृतिक वादियों, उपजाऊ कृषि भूमि और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी देश के इतिहास में एक ऐसा दर्दनाक अध्याय भी दर्ज है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। साल 1932-33 में यूक्रेन में ऐसा भीषण अकाल पड़ा कि लाखों लोगों की भूख और कुपोषण से मौत हो गई। हालात इतने भयावह हो गए थे कि ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार कुछ लोग जीवित रहने की आखिरी कोशिश में नरभक्षण तक करने पर मजबूर हो गए।

इतिहास में इस अकाल को ‘होलोडोमोर’ (Holodomor) के नाम से जाना जाता है। कई इतिहासकार इसे 20वीं सदी की सबसे भीषण मानवीय त्रासदियों में से एक मानते हैं। अलग-अलग अध्ययनों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, लेकिन अनुमान है कि इस अकाल में 35 लाख से 70 लाख लोगों तक की जान गई।

आखिर क्यों पड़ा था यह अकाल?

1932-33 के दौरान तत्कालीन सोवियत संघ में कृषि के सामूहिकीकरण (Collectivization) की नीति लागू की गई। किसानों से बड़ी मात्रा में अनाज सरकारी कोटे के रूप में लिया गया। नतीजतन यूक्रेन के कई इलाकों में लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा। धीरे-धीरे गांवों में भुखमरी फैल गई और लोग भोजन के एक-एक दाने के लिए तरसने लगे।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लोगों ने पहले जंगली घास, पेड़ों की छाल, जानवरों का चारा और जो भी खाने योग्य मिला, उसका सहारा लिया। जब भोजन के सभी साधन खत्म हो गए, तब कुछ स्थानों पर ऐसे मामले सामने आए, जहां लोगों ने इंसानी मांस तक खा लिया।

उस समय के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, नरभक्षण के आरोप में करीब 2,500 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इतिहासकार इस बात पर जोर देते हैं कि ये घटनाएं अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में हुई थीं और इन्हें पूरे यूक्रेनी समाज का व्यवहार नहीं माना जाना चाहिए।

पूर्वी यूरोप का महत्वपूर्ण देश है यूक्रेन

यूक्रेन पूर्वी यूरोप का एक बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है। इसकी पूर्वी सीमा रूस से लगती है, जबकि उत्तर में बेलारूस स्थित है। इसके अलावा पोलैंड, स्लोवाकिया, हंगरी, रोमानिया और माल्दोवा जैसे देशों के साथ भी इसकी सीमाएं मिलती हैं। दक्षिण में काला सागर (Black Sea) और अजोव सागर (Sea of Azov) इसकी भौगोलिक और आर्थिक महत्ता को बढ़ाते हैं।

यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) देश का सबसे बड़ा शहर है। यह शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, प्राचीन चर्चों और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। लंबे समय से कीव को खूबसूरत महिलाओं के शहर के रूप में भी लोकप्रियता मिली है, हालांकि यह एक सांस्कृतिक धारणा है, कोई आधिकारिक पहचान नहीं।

संगीत और संस्कृति की भी है अलग पहचान

यूक्रेन केवल अपनी खेती और प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी लोक संस्कृति और संगीत के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है। यहां के लोगों को संगीत से विशेष लगाव है। दुनिया का सबसे लंबा पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र ‘ट्रेंबिटा’ (Trembita) भी यूक्रेन से जुड़ा हुआ है।

लकड़ी से बने सींग के आकार के इस वाद्ययंत्र की लंबाई कई मीटर तक हो सकती है। कार्पेथियन पर्वतीय क्षेत्रों में इसका उपयोग पारंपरिक समारोहों और दूर तक संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था।

आज भी विवाद का विषय है होलोडोमोर

1932-33 के इस अकाल को लेकर आज भी इतिहासकारों और विभिन्न देशों के बीच मतभेद हैं। यूक्रेन और कई अन्य देश इसे नरसंहार (Genocide) के रूप में मान्यता देते हैं, जबकि कुछ देशों और इतिहासकारों की अलग राय है।

हालांकि इस बात पर व्यापक सहमति है कि यह मानव इतिहास की सबसे भयावह मानवीय आपदाओं में से एक थी, जिसमें लाखों निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई।

इतिहास से मिलने वाली सीख

यूक्रेन का यह दर्दनाक अध्याय बताता है कि जब राजनीतिक फैसले, खाद्य संकट और प्रशासनिक विफलताएं एक साथ सामने आती हैं, तो उनके परिणाम कितने विनाशकारी हो सकते हैं। भूख केवल शरीर को ही नहीं तोड़ती, बल्कि समाज और इंसानियत की बुनियाद तक को हिला देती है।

आज का यूक्रेन अपनी संस्कृति, शिक्षा, विज्ञान और कृषि के लिए दुनिया में पहचान रखता है, लेकिन 1932-33 का अकाल उसकी सामूहिक स्मृति का ऐसा घाव है, जिसे समय भी पूरी तरह नहीं भर पाया। यह त्रासदी आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाती है कि भोजन, मानवीय गरिमा और जीवन की सुरक्षा किसी भी सभ्य समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।