चीन ने उइगर मुस्लिम विद्रोह को पूरी तरह कुचलने के लिए एक कठोर फैसला लेते हुए कुरान सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों को अपने हिसाब से लिखने की घोषणा की है. कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि उइगर मुस्लिम महिलाओं को चीनी मर्दों के साथ सोने के लिए जबरदस्ती मजबूर किया जाता है और इसके लिए वहां ‘जोड़ी बनाओ और परिवार बनो’ नाम का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है. वहीं, मुस्लिमों को रोजा रखने पर भी चीन ने रोक लगा रखा है। 

चीन के शिनजियांग प्रांत में में लगातार मुस्लिमों के खिलाफ चीन के कार्रवाईयों की खबरें सामने आती रहती हैं. कई मुसलमानों को उनके परिवार से दूर डिटेंशन कैंपों में भेज दिया जाता है.

‘काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भागने में कामयाब रहे कुछ मुस्लिमों का कहना है कि उन्हें जबरन इस्लाम का त्याग करने के लिए मजबूर किया गया और चीन की सत्तारूढ़ पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार रहने की प्रतिज्ञा दिलवाई गई.

अब चीन ने एक और निर्णय लिया जिसमें वह कुरान, बाइबल सहित उन धर्म ग्रंथों को अपने हिसाब से लिखेगा जो की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के विश्वासों के खिलाफ जाती हो. पार्टी के एक अधिकारी ने बताया कि उनमें या तो बदलाव किया जाएगा या फिर उनका फिर से अनुवाद करवाया जाएगा.

पश्चिमी देश अक्सर चीन की 10 लाख मुस्लिमों को शिनजियांग प्रांत में कैद में रखने और उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते रहते हैं. शुरुआत में चीन इन कैंपों के होने की बात को ही खारिज करता रहा लेकिन बाद में उसने इन्हें धार्मिक अतिवाद और आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाए गए प्रशिक्षण केंद्र का नाम दे दिया.

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि उइगर मुस्लिम महिलाओं को चीनी मर्दों के साथ सोने के लिए जबरदस्ती मजबूर किया जाता है। इसके लिए वहां एक कार्यक्रम ‘जोड़ी बनाओ और परिवार बनो’ भी चलाया जा रहा है. उइगर मुस्लिम महिलाओं ने बताया कि जेल के एक बेहद छोटे से कमरे में 50 लोगों को रखा जाता है और उन्हें खाने में सिर्फ मांस के कुछ टुकड़े मिलते हैं.  

ब्रिटेन ने यूएन में दिए अपने बयान में साफ-साफ उइगर समुदाय को टारगेट करने के लिए बनाए गए सामूहिक हिरासत केंद्र, सांस्कृतिक और धार्मिक क्रियाकलापों को रोकने और उन पर कड़ी निगरानी की रिपोर्ट्स को लेकर चिंता जताई थी. इसके अलावा, अमेरिका ने उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के आरोप में चीन की 28 सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर साल 2001 में हुए आतंकी हमले के बाद चीन में उइगर मुसलमानों पर जुल्म और सरकार की पाबंदियां बढ़नी तेज हो गई. इस घटना के बाद से चीन धीरे-धीरे और चुपचाप उइगर मुस्लिमों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों की गतिविधियों पर प्रतिबंध बढ़ाता जा रहा है.

शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर चीन सरकार ने इस कदर पाबंदियां लगा रखी है कि साल 2014 में उन पर रमजान के दौरान रोजा रखने पर भी रोक थी. चीन का आरोप है कि ये मुसलमान अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हैं और आतंकवाद से सहानुभूति रखते हैं.