जैविक बदलाव कर मानवता से खेल रहा है चीन, सेना को मजबूत बनाने के लिए सैनिकों का बदल रहा है डीएनए
खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाने के लिए चीन वो तमाम कोशिशें कर रहा है, जिससे दुनिया मुश्किल में पड़ रही है और आगे भी पड़ सकती है। कोरोना वायरस के फैलाव के बाद चीन से एक और खबर सामने आ रही है, जो दुनिया को डरा रही है। खबर है कि चीन अपनी सेना को अपराजेय बनाने के लिए सैनिकों पर जैविक परीक्षण कर रहा है। इस परीक्षण में सैनिकों पर जैविक प्रयोग करके उनके मानवीय संरचना में बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। इससे चीन अपने सैनिकों को ऐसा बनाने की चेष्टा कर रहा है, जिनमें किसी तरह की भावना ना रहे और ना ही उन पर किसी तरह के प्राकृतिक या कृत्रिम हालातों का प्रभाव पड़े।

इस परीक्षण में जिस चीनी वैज्ञानिक का नाम सामने आया है, वह हैं He Jiankui और इन्होंने साल 2018 में सात जोड़ों पर यह जैविक प्रयोग किया था। फिलहाल इसके नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन अंदेशा जताया जा रहा है कि डीएनए में मिलावट से तैयार शख्स पूरी तरह से सेना के लिए काम करने के बनाया गया होगा। उसका दिमाग हमेशा आक्रामक तरीके से सोचेगा और शरीर भी उसी तरह काम करेगा।
हालांकि चीन ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन CRISPR-Cas तकनीक के बारे में चीनी रक्षा विभाग का एक दस्तावेज गलती से मीडिया में आ चुका है। इसमें चीन ने माना है कि वह साल 2016 से जीन-एडिटिंग पर काम कर रहा है, ताकि सैनिकों की ताकत बढ़ाई जा सके। इस बारे में नेचर बायोटेक्नोलॉजी (Nature Biotechnology) जर्नल में खौफनाक रिपोर्ट आ चुकी है।

