कभी कांवड़ से डरता था यूपी, अब उमड़ रहा आस्था का सैलाब! योगी मॉडल ने बदली यूपी की तस्वीर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को 1 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए धार्मिक पर्यटन के महत्व को समझ लिया है। इस क्षेत्र को बढ़ाने के लिए वो लगातार प्रयास कर रहे हैं और इसकी खुद निगरानी भी कर रहे हैं। इसी के तहत 8 अगस्त 2026 को सावन मास मेरठ के मोदीपुरम क्षेत्र में काँवड़ियों पर मंच और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की। सीएम योगी ने काँवड़ मार्ग का हवाई सर्वेक्षण भी किया और कहा कि काँवड़ यात्रा सामाजिक समता व राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
सीएम योगी का यह बयान अनायास नहीं है। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त बूम दी है। इसमें काँवड़ यात्रा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज काँवड़ यात्रा से जुड़ा कारोबार हजारों करोड़ रुपये का हो गया है। इसमें खाने-पीने, कपड़े, पूजा-सामग्री, यात्रा से लेकर काँवड़ निर्माण तक शामिल है।
काँवड़ यात्रा सावन के पवित्र महीने में निकाली जाती है। इस दौरान हिंदू श्रद्धालु गंगा या अन्य पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान शिव के विभिन्न मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह कई दिनों तक होती है। इस यात्रा से भारत के पारंपरिक कुटीर उद्योग को जबरदस्त लाभ मिलता है।
काँवड़ यात्रा यह कारोबार 5,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। देश के सबसे बड़े व्यापार संगठन CAIT यानी कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह अनुमान लगाया है। यह अनुमान सिर्फ काँवड़ निर्माण से जुड़ा है। अगर इस यात्रा से जुड़े अन्य क्षेत्रों की बात की जाए तो कारोबार कई गुना बढ़ जाएगा।
अगर श्रद्धालुओं की बात करें उत्तराखंड सरकार के अनुसार हाल के वर्षों में हरिद्वार काँवड़ यात्रा में लगभग 4.5 करोड़ श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं, झारखंड सरकार के अनुसार देवघर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में प्रतिवर्ष 50 से 55 लाख श्रद्धालु पहुँचते हैं। वहीं, काँवड़ों की कीमत सामान्यत: 500 रुपये से लेकर 7,000 रुपये तक होती है।
इस कारोबार में उत्तर प्रदेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। व्यापारिक संगठनों का अनुमान है कि इस बार काँवड़ यात्रा से प्रदेश में करीब 1500 करोड़ रुपए का कारोबार होने की उम्मीद है। सिर्फ मेरठ में ही लगभग 300 करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है। यात्रा समाप्त होने तक यह कारोबार और बढ़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
उत्तर प्रदेश में साल 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद काँवड़ियों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसकी वजह से होटल, ढाबे, ट्रांसपोर्ट, टेंट, पूजा सामग्री, खाने-पीने के सामान और स्थानीय व्यापार का विस्तृत हुआ है।
इसकी वजह योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था में सुधार महत्वपूर्ण कारण है। साल 2017 से पहले काँवड़ यात्रा में लोगों की संख्या 2 करोड़ के आसपास होती थी, जो बढ़कर अब लगभग 5 करोड़ हो गई है। इनमें महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।
साल 2017 से पहले काँवड़ यात्रा में जाना और अपनी धार्मिक गतिविधियों को अंजाम देना एक दुरूह कार्य था। सपा सरकार के दौरान काँवड़ यात्रा के दौरान गुंडागर्दी, मारपीट, काँवड़ियों से बदसलूकी, मुस्लिम तुष्टीकरण के कारण काँवड़ यात्रा में गाने बजाने पर रोक, नमाज के दौरान काँवड़ यात्रा पर रोक आदि प्रमुख कारण रहे हैं।
कई बार ऐसी स्थिति आई है कि मुस्लिमों के ऐतराज के बाद काँवड़ यात्रा को रोकनी पड़ी। कई बार तो सांप्रदायिक तनाव तक पैदा हो गया। ऐसी स्थिति विशेष तौर पर मुस्लिम बहुल कहलाने वाले मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, सहारनपुर आदि में देखने को मिलती थी।
साल 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद सबसे पहले मुस्लिम तुष्टीकरण की इस नीति पर अंकुश लगाया गया और काँवड़ यात्रा में किसी तरह का विघ्न ना पैदा हो, इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। इतना ही नहीं, प्रदेश सरकार काँवड़ियों पर पुष्प वर्षा आदि के जरिए उनकी आस्था को सम्मान दिया गया।
इसका परिणाम काँवड़ियों की संख्या में भारी वृद्धि के रूप में सामने आया। काँवड़ यात्रा के दौरान अब कोई सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं करता। बात सिर्फ काँवड़ यात्रा की नहीं, किसी भी हिंदू त्योहार के दौरान हिंदुओं को परेशान करने की कोशिश नहीं की जाती है।
प्रशासन ने काँवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की हैं। महिला काँवड़ियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि उन्हें किसी तरह की असुविधा का सामना ना करना पड़े। सरकार ने यात्रा के लिए ‘जीरो इंसिडेंट’ और ‘जीरो एक्सीडेंट’ (यानी कोई हादसा न हो) का लक्ष्य रखा है।
योगी सरकार काँवड़ यात्रा को देखते हुए सड़क मरम्मत, बैरिकेडिंग, पुलिस व्यवस्था, मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, CCTV, ड्रोन निगरानी, पेयजल, बिजली, सफाई जैसे कामों को बखूबी पूरा किया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशान ना हो। रास्तों में उनके रुकने और आराम करने के लिए जगहों और खाने-पीने की दुकानों की व्यवस्था की गई है।
योगी सरकार की पर्यटन इकोनॉमी
विकास को धार्मिक पर्यटन और टेंपल इकोनॉमी से जोड़कर योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का कायाकल्प कर दिया है। प्रदेश के पर्यटन विभाग ने 31 मार्च 2026 तक की स्वीकृत परियोजनाओं के तहत 33 पर्यटन और धार्मिक विकास कार्यों पर लगभग 79.18 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया था।
इनमें मिर्जापुर के 7 विभिन्न आस्था स्थलों का विकास, बांदा के 6 धार्मिक पर्यटन विकास, चित्रकूट के 6 आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, भदोही के 5 पर्यटन विकास परियोजनाएँ, महोबा के 3 विभिन्न मंदिरों का सौंदर्यीकरण, सोनभद्र के 2 धार्मिक पर्यटन संवर्धन, हमीरपुर में 2 बुनियादी सुविधाओं का निर्माण, लखनऊ में 1 मोहनलालगंज के हुलासखेड़ा का विकास और सीतापुर में नैमिषारण्य धाम में बेदारण्यम की स्थापना शामिल हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने 9 साल के कार्यकाल में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं। साल 2025 के आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ है, जिनमें 36 लाख विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। यह आँकड़ा साल 2016 के आँकड़े से तीन गुना अधिक है।
घरेलू पर्यटन के मामले में उत्तर प्रदेश अब पूरे देश में पहले स्थान पर है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद वहाँ के श्रद्धालुओं की संख्या में लगभग पाँच गुना वृद्धि हुई है। वहीं, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद सिर्फ वर्ष 2025 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुँचे। इस तरह अयोध्या ने मक्का और वेटिकन सिटी को धार्मिक पर्यटन के मामले में पीछे छोड़ दिया है।
अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में ही करीब 116 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुँचे। यह संख्या प्रदेश की कुल पर्यटक संख्या का लगभग 90 प्रतिशत है। मथुरा, मिर्जापुर के माँ विंध्यावसिनी मंदिर, चित्रकूट में लगभग 9 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी
आजादी के बाद से लेकर साल 2016 तक राष्ट्रीय पर्यटन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत थी। उस समय तक राज्य में साल भर में सिर्फ 21 करोड़ पर्यटक ही आते थे। साल 2017 के बाद यह आँकड़ा लगभग 5 गुना बढ़ गया है। वहीं, राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत हो गई है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की सरकार ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या राम जन्मभूमि, मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि, श्री बांके बिहारी धाम, मां विन्ध्यवासिनी धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शाकुंभरी धाम, देवीपाटन धाम, सारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशांबी और सोनभद्र धाम जैसे पवित्र स्थलों का विकास किया। इसके साथ रामायण सर्किट, कृष्ण सर्किट, बौद्ध सर्किट और शक्ति सर्किट का विकास जारी है। इसके अलावा, नाथ कॉरिडोर का भी विकास किया जा रहा है।
योगी सरकार ने साल 2025 में कहा था कि ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व वाले स्थलों को आपस में जोड़ने वाले मार्गों के सुदृढ़ीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए 4,560 करोड़ रुपये की योजना लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत 272 कार्यों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।
राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान
इस तरह, उत्तर प्रदेश की कुल अर्थव्यवस्था (GSDP) को 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाने में राज्य के सभी मंदिरों और धार्मिक केंद्रों की ‘टेंपल इकोनॉमी’ एक मुख्य आर्थिक इंजन की तरह काम कर रही है। ये सालाना 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष व्यापार चक्र पैदा करती है।
एसबीआई रिसर्च और यूपी पर्यटन विभाग की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अयोध्या धाम, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मथुरा-वृंदावन और महाकुंभ जैसे वैश्विक धार्मिक केंद्रों पर सालाना 156 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन के कारण होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योगों में भारी उछाल आया है।
इस सुनियोजित आध्यात्मिक पर्यटन मॉडल ने जहां राज्य में 5 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित किए हैं और छोटे व्यापारियों की दैनिक आय को कई गुना बढ़ाया है। वहीं, राज्य सरकार को भी प्रतिवर्ष 20-25 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स राजस्व मिल रहा है।