दिल्ली का कसाई चंद्रकांत झा (साभार: नवभारत टाइम्स)

बिहार के एक दरिंदे की दिल दहला देने वाली कहानी पर आधारित नेटफ़्लिक्स ने ‘इंडियन प्रिडेटर: बूचर ऑफ दिल्ली’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ शुरू की है। 

यह कहानी है चंद्रक्रांत झा नाम के एक सीरियल किलर की है, जो दिल्ली में हुई सीरियल किलिंग का जिम्मेदार था। उसने हत्या करने वाले लोगों के सिर काटा और फिर उनके शव के टुकड़े-टुकड़े कर तिहाड़ जेल के सामने टोकरी में भरकर रख दिया।

नवभारत टाइम्स के अनुसार, चंद्रकांत झा इतना ही नहीं करता, बल्कि वह ऐसा करके पुलिस को खुला चैलेंज देता था और कहता था कि पकड़ सकते हो तो पकड़ कर दिखाओ। 

चंद्रकांत झा बिहार के मधेपुरा का रहने वाला है। इसे नेटफ़्लिक्स ने अपनी सीरीज में में ‘दिल्ली का कसाई’ बताया है। कहा जाता है कि उसने 44 मर्डर किए हैं। हालाँकि, डॉक्यूमेंट्री में तीन हत्याओं की ही बात की गई है।

20 अक्टूबर 2006 को दिल्ली के हरिनगर पुलिस स्टेशन में सुबह-सुबह फोन की घंटी बजी। फोन करने वाले ने खुद को हत्यारा बताते हुए कहा कि उसने तिहाड़ जेल के गेट नंबर-3 के ठीक बाहर टोकरी में एक लाश रखी है, जाकर उठा लो।

फोन करने वाले की बात सुनकर हड़कंप मच गया। पुलिस को लग गया कि अगर यह घटना सही है और तिहाड़ जेल जैसे सुरक्षित और हाई सिक्योरिटी जेल के सामने कोई हत्या करके शव को टुकड़ों में काट कर रख दे और खुद ही पुलिस को फोन करके बता भी दे, तो यह आम हत्यारा नहीं हो सकता है।

पुलिस जब वहाँ पहुँची तो ठीक वैसा ही था, जैसा फोन करने वाला ने कहा था। पुलिस ने जोरशोर से तलाशी अभियान शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं चला।

इस घटना के ठीक 6 महीने बाद एक और ऐसा ही मर्डर हुआ और इस बार भी तिहाड़ जेल के बाहर लाश रख दी गई। शव के सिर और हाथ-पैर गायब थे। 

किसी आदमी को काटकर उस हत्यारे ने उसका सिर यमुना नदी में फेंक दिया था। लाश को बांधने का अंदाज भी वही था। पुलिस को अंदाजा लग गया कि यह घटना भी उसी सिरफिरे हत्यारे की देन है। इसके बाद  दिल्ली पुलिस की रातों की नींद हराम हो गई।

 

दिल्ली पुलिस अभी इस मामले से बाहर निकली भी नहीं थी कि करीब एक महीने बाद फिर वही कांड दोहराया गया और लाश तिहाड़ के बाहर मिली। 
 
हर बार लाश के साथ एक चिट्ठी मिलती थी। चिट्ठी में एक ही बात लिखी होती थी- दिल्ली पुलिस का जीजा या दिल्ली पुलिस का बाप सीसी। हत्यारा अपना नाम सीसी बताता था और खुद को दिल्ली पुलिस का बाप कहता था।

 

 

जिस वक्त एक के बाद एक हत्याएं हो रही थीं, उस वक्त दिल्ली पुलिस के सुंदर सिंह यादव इस केस को देख रहे थे। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री में बताया है कि तिहाड़ के सामने लाश रखने का एक खास मकसद होता था।

 

 

 

बताया जाता है कि चंद्रकांत झा को किसी मामले में जेल हुई, जहां कॉन्स्टेबल बलबीर ने उसे परेशान किया, नंगा किया और खाना भी नहीं मिलता था। बस इसी बात को लेकर उस पर सनक सवार हो गया था।
चंद्रकांत झा हर मर्डर से पहले उस कॉन्स्टेबल की ड्यूटी चेक करता और फिर लाश टोकरी में रखकर उसी गेट के पास वाले नंबर पर फोन करता था, जहां बलबीर की ड्यूटी होती थी।

 

 

चंद्रकांत ने कुल कितने मर्डर किए इसका वास्तव में कोई हिसाब नहीं है। साल 1998 में पहली बार चंद्रकांत का नाम पुलिस की रडार पर आया था। 
 
पैसों को लेकर उसने वेंडर एसोसिएशन के हेड मंगल सेन पंडित की हत्या कर दी थी। कहा जाता है कि मधेपुरा में हत्या करने के बाद ही झा दिल्ली आया था। जब कोई उससे झूठ बोलता तो वह उसकी जान ले लेता था।

 

झा बिहार से दिल्ली आने वाले लोगों को ही अपना दोस्त बनाता। उसके साथ वह रहता और फिर अगर थोड़ी सी भी गड़बड़ होती थी तो वह उसे मौत के घाट उतार देता था। डॉक्यूमेंट्री में उसके इस गांव के लोगों ने भी कहा कि उसने 44 मर्डर किए थे।

 

 
तीसरे मर्डर की जाँच के दौरान दिल्ली पुलिस एक डॉक्टर तक पहुँच गई, जहाँ चंद्रकांत झा अक्सर जाया करता था। इसके बाद झा का स्केच तैयार किया गया और फिल्मी अंदाज में उसे पकड़ने की घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने अपना हुलिया बदला और डॉक्टर के आसपास जाल बिछा दिया और फिर साल 2007 में ही उसे पुलिस ने दबोच लिया।

 

चंद्रकांत को पहले फांसी की सजा हुई थी। बाद में इस सजा को उम्रकैद में बदल दी गई। जनवरी 2022 में उसने परोल की माँग की, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया। चंद्रकांत झा तिहाड़ जेल में अपना जीवन बीता रहा है।

>