बिहार में ‘फर्जी थाना’ के बाद ‘फर्जी बहाली’: 5 साल तक होता रहा ट्रांसफर, पर वेतन नहीं
बिहार में फर्जी थाना चलाने के बाद अब फर्जी बहाली का मामला सामने आया है। जिन लोगों को बहाली दी गई, वे पांच साल तक नौकरी करते रहे। उनकी पोस्टिंग भी होती रही, लेकिन वेतन नहीं मिलता। मामले का खुलासा तब हुआ, जब बहाल हुए लोगों ने वेतन की गुहार लगाई। तब चला कि स्वास्थ्य विभाग में इस तरह के किसी पद पर नियुक्ति ही नहीं हुई है।
इस फर्जीवाड़े का मास्टमाइंड मधुबनी के मधवापुर थाना क्षेत्र के अंदौल का रहने वाला अवधेश ठाकुर उर्फ भिखारी ठाकुर और पटना के जक्कनपुर थाने के लक्ष्मी सागर कॉलोनी का रहने वाला गिरिजानंद पांडेय है। दोनों ने कई लोगों को बहाली के नाम पर लोगों को धोखा देकर ठगी की। ठाकुर अपने गाँव में मुखिया है। वहीं, पांडेय सचिवालय का निलंबित क्लर्क है।
रीना ने बताया कि कोरोना काल से पहले ठाकुर और पांडेय उसके घर भी आते-जाते थे, लेकिन कोरोना खत्म होने के बाद जब उसने पांडेय से संपर्क करना शुरू किया तो उसने फोन उठाना ही बंद कर दिया। इसके बाद रीना को इस पूरे मामले को लेकर संदेह उठा। इसके बाद उसने सभी लोगों को इकट्ठा किया।
मंगलवार (23 अगस्त 2022) को ठगी होने का विश्वास हो जाने के बाद महिला ने समस्ती के सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले का खुलासा हुआ। महिला समस्तीपुर के बंगरा थाने के कुबौली राम की निवासी है और उसके पति का नाम कुमार गौरव है।
महिला रीना का कहना है कि वह नौकरी खोज रही थी, तभी ठाकुर और पांडेय ने उससे संपर्क किया और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का लालच दिया। दोनों रीना के पूर्व परिचित हैं। दोनों ने उससे मैट्रिक और इंटर के प्रमाण पत्र लिए और 100-100 रुपए के सादा स्टांप और 5 लाख रुपए नकद लिए।
उसके बाद साल 2016 में दोनों ने उसे स्वास्थ्य विभाग की फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र दे दिया और साल 2021 तक उसके आधार पर उनकी पोस्टिंग भी हो गई। बड़ा बाबू ने उनका ट्रांसफर भी कर दिया। लगातार पाँच तक नौकरी करने के बाद जब उसे वेतन नहीं मिला तो उसने छानबीन शुरू की। उसे पता चला कि उसकी तरह और 11 लोग भी हैं। तब उसे अपने साथ हुई ठगी का पता चला और मामले का खुलासा हुआ।